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क्या बारिश के दिनों में सोलर पैनल काम करती है? | Do Solar Panel Works in Rainy Season?

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क्या बारिश के दिनों में सोलर पैनल काम करती है अर्थात जब आकाश में बदल होते हैं  सोलर पैनल बिजली उत्पन्न करती है?

हम सब ये अच्छे से जानते हैं की जब सूरज की किरणे सोलर पैनल पे पड़ती है तो इसके फलस्वरूप बिजली उत्पन्न होती है, अर्थात सोलर पैनल सूरज की किरणों से ऊष्मा लेकर उससे बिजली उत्पन्न करती है ( हीट एनर्जी को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में बदलती है )

अब आपके मन में एक सवाल जरूर आ रही होगी की क्या बारिश के दिनों भी जब आकाश में बादल होते हैं सोलर पैनल बिजली उत्पन्न करती है। हमारे देश में या फिर कहे विश्व में पुरे साल एक सा मौसम नहीं होता है, कहने का तात्पर्य है पुरे साल में काम से कम दो से तीन महीने बारिश का मौसम होता है और बारिश के दिनों में आकाश में बादल होने के कारण धुप नहीं होती है।

क्या बारिश के दिनों में सोलर पैनल कम करती है ?

आपको इस सवाल से बिलकुल चिंता करने की जरूरत नहीं है क्यों की बारिश के दिनों में भी सोलर पैनल कम करती है और बिजली उत्पन्न करती है। कारण की जब आकाश में बादल होते है वैसे स्थिति में भी सूरज की किरणे बदलो के बिच से अपना रास्ता बना लेती है और जब वहीं किरणे सोलर पैनल पे पड़ती है तो उससे बिजली उत्पन्न होती है।

पर यहाँ पर मैं एक बात जरूर बताना चाहूंगा की बारिश के दिनों में सोलर पैनल धुप वाले दिनों की तुलना में काम बिजली उत्पन्न नहीं करती है। साथ हीं सोलर पैनल के बिजली उत्पन्न करने की क्षमता इस बात पे भी निर्भर करती है की बादल का घनत्व कितना है।

बारिश के दिनों में
सोलर पैनल का ढूप वाले दिन बिजली पैदा करने का ग्राफ
बारिश के दिनों में
सोलर पैनल का बादल वाले दिन बिजली पैसा करने का ग्राफ

ऊपर के दोनों ग्राफ को देखने से साफ़ पता चल रहा है की सोलर पैनल हर मौसम में बिजली उत्पन्न करती है पर इसकी बिजली उत्पन्न करने की क्षमता काम हो जाती है जब आकाश में बादल होता है।

बारिश के दिनों में जब बिजली कम उत्पन्न होगी तो क्या होगा ?

अब आपके मन एक दूसरा सवाल आ रहा होगा की जब हमारा सोलर पैनल काम बिजली उत्पन्न करेगी तो क्या होगा ?

तो मैं आपको बता दूँ की आपको इसमें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, क्यूंकि जब सोलर पैनल काम बिजली उत्पन्न करेगी वैसी स्थिति में भी नेट मीटरिंग (Net Metering) की मदद से आपका घर ग्रिड से जुड़ा रहेगा और आप बिजली का प्रयोग कर पाएंगे।

अगर आपका सोलर पैनल आपके जरूरत के मुताबित बिजली उत्पन्न नहीं कर पा रही तो अतिरिक्त बिजली आपको ग्रिड से मिल जाएगी। नेट मीटरिंग की मदद से आपको उतना हीं बिजली बिल बिजली विभाग को देना होगा जितना आप ग्रिड से ले रहे हैं।

बारिश के दिनों में सोलर पैनल कम कैसे करती है ?

आप सब ये अच्छे से जानते हीं होंगे की सोलर एनर्जी सिस्टम दो तरह के होते हैं, ऑन ग्रिड सोलर एनर्जी सिस्टम  (On  Grid  Solar  Energy  System) और ऑफ ग्रिड सोलर एनर्जी सिस्टम (Off Grid Solar Energy System)

अगर हम ऑन ग्रिड सोलर एनर्जी सिस्टम  (On  Grid  Solar  Energy  System) की बात करे तो जब बारिश के दिनों में सोलर पैनल हमारे जरूरत के अनुसार बिजली उत्पन्न नहीं कर पा रही है तो अतिरिक्त बिजली ग्रिड से पूरी हो जाती है। पर ऐसा तो कभी कभी हीं होता है है जब पुरे दिन धुप नहीं निकलती है तब वैसी स्थिति में जब कभी सोलर पैनल अपनी पूरी क्षमता के अनुसार बिजली उत्पन्न करेगी तो वैसी स्थिति में शेष बिजली ग्रिड में चली जाएगी, और यह प्रक्रिया पुरे दिन चलता रहेगा।

आपको इसमें कुछ करने की जरूरत नहीं है ना हीं इसके बारे में आपको कुछ चिंता करनी है, क्यूंकि ये सारा हिसाब किताब आपने जो नेट मीटरिंग (Net Metering) लगा राखी है उसके द्वारा किया जाता है।

अब अगर हम ऑफ ग्रिड सोलर एनर्जी सिस्टम (Off Grid Solar Energy System) की बात करे तो वही प्रक्रिया इसमें भी होती है। बस हमें इस बात का ख्याल रखना होगा की सोलर पैनल पे धुल या गंदगी नहीं होनी चाहिए।

इस तरह हमें बारिश के दिनों में भी उपयुक्त बिजली की आपूर्ति होती रहती है। पर यदि हमारा सोलर पैनल हमारे जरूरत के अनुसार बिजली उत्पन्न नहीं कर पा रही है या फिर हम जिस जगह पे रह रहे हैं वहां बारिश के दिनों में पुरे दिन धुप नहीं निकलती है।

तो वैसी स्थिति में हमे सोलर पैनल लगवाते समय इस बात का ख्याल रखना होगा की जब हम रूफ टॉप सोलर सिस्टम (Roof Top Solar System) लगवा रहे हैं उस समय सोलर मॉडुल का चयन करते हमे धयान रखना होगा की हम मोनोक्रिस्टलीन (Monocrystalline) मॉडुल का हीं चयन करे क्यूंकि यह बारिश के दिनों में भी दूसरे सोलर पैनल के तुलना में जयादा बिजली उत्पन्न करती है।

 

निष्कर्ष (Conclusion):

बारिश के दिनों में भी सोलर पैनल कम करती है अर्थात बिजली उत्पन्न करती है, पर इसके बिजली उत्पन्न करने की क्षमता उतनी नहीं होती है जितनी ढूप वाले दिनों में होती है। साथ हीं अगर हम वैसे जगह पे रह रहे हैं जहाँ बारिश के दिनों में ढूप बिलकुल नहीं निकलती है वैसी स्थिति में हमे मोनोक्रिस्टलीन (Monocrystalline) लगवाना चाहिए, क्यूंकि इसकी बिजली उत्पन्न करने की क्षमता दूसरे मॉडुल की तुलना जयादा अच्छी है।

FAQs:

Question: क्या बारिश के दिनों में सोलर पैनल कम करती है ?

Answer: जी हाँ बारिश के दिनों में भी सोलर पैनल कम करती है अर्थात यह बिजली उत्पन्न करती है, पर इसके बिजली उत्पन्न करने की क्षमता काम हो जाती है।

Question: अगर हम जिस जगह पे रह रहे हैं वहां धुप बहुत काम निकलती है वैसे जगह के लिए कौन सा सोलर पैनल जयादा अच्छा होता है ?

Answer: अगर आप जिस जगह पे रह रहे हैं वहां अक्सर बादल घिरा रहता है वैसे जगह के लिए आपको मोनोक्रिस्टलीन (Monocrystalline) सोलर पैनल लगवाना चाहिए, क्यूंकि इसकी क्षमता दूसरे पैनल की तुलना में जयादा होती है। और यह बारिश के दिनों में भी दूसरे मॉडुल की तुलना में जयादा बिजली उत्पन्न करती है।

 

इम्पोर्टेन्ट लिंक (Important Link)

सोलर पैनल की दिशा क्या होनी चाहिए ?

सोलर पैनल लगवाते समय किन सुरक्षा बिंदुओं पे धयान रखना चाहिए ?

सोलर मॉडुल खरीदते समय किन बातों का ख्याल रखना चाहिए ?

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  1. This is the question I guess most of the people have in their mind. Your post has clarified it so well. Thank you so much.

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