रूफ टॉप सोलर में प्रयोग होने वाले उपकरण | Equipment's Used For Roof Top Solar - MS3 Naveen Kumar

रूफ टॉप सोलर में प्रयोग होने वाले उपकरण | Equipment’s Used for Roof Top Solar

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रूफ टॉप सोलर

जैसा की हम जानते हैं आजकल रूफ टॉप सोलर (Roof top solar) काफी चर्चा का विषय बन गया है। हम जब भी अपने घर से बहार निकलते हैं 10 में से 5 घर के छत के ऊपर सोलर पैनल दिख हीं जाता है।

अगर आप भी अपने छत पे सोलर पैनल लगवाना चाहते हैं तो इस आर्टिकल को अंत तक पढ़े, क्यूंकि इस आर्टिकल में हम आपको बताएँगे की छत पर सोलर लगवाने के लिए क्या क्या इक्विपमेंट लगते हैं, सोलर लगवाने के क्या क्या फायदे हैं और सोलर लगवाने क्या प्रक्रिया है। पर सबसे पहले आपको ए समझना होगा की आखिर सोलर एनर्जी क्या है और ए काम कैसे करता है।  

रूफ टॉप सोलर
रूफ टॉप सोलर

जब हम छोटे थे तो अक्सर एक शब्द सुना करते थे सोलर कुकर (Solar Cooker), आखिर सोलर कुकर क्या होता है?  तो मैं आपको बता दूँ की वो भी एक तरह का सोलर एनर्जी (Solar Energy) हीं  है, फर्क बस इतना है की ओ सोलर एनर्जी (Solar Energy) को हीट एनर्जी (Heat Energy) में बदलता है, और सोलर पैनल(Solar Panel) सोलर एनर्जी (Solar Energy) को इलेक्ट्रिकल एनर्जी (Electrical Energy) में बदलती है।

जब भी सूरज की किरण सोलर सेल (Solar Cell) पर पड़ती है तो सेल के इलेक्ट्रान P Type cell से N Type cell की तरफ प्रवाह करने लगते हैं, और इन्ही इलेक्ट्रान के प्रवाह के कारन बिजली उत्पन्न होती है। एक सोलर मॉडुल  (Solar Module) में बहुत सारे सोलर सेल (Solar Cell) होते हैं, जब बहुत सारे सेल को एक मॉडुल में रखा जाता है तो उसे सोलर मॉडुल (Solar Module) कहते हैं, और जब हम बहुत सारे मॉडुल  को एक दूसरे से जोड़ा जाता हैं तो उसे ऐरे (Array) कहते हैं।

जैसे की हम जानते हैं और अक्सर ए सुना भी है की आज कल प्रदुषण बहुत बढ़ गया है। कोयला का श्रोत भी हमारे पास सिमित है। और जितने भी थर्मल पावर प्लांट है ओ सब या तो कोयला से चलते हैं या डीज़ल से, इसी कारण सरकार भी सोलर एनर्जी पर बहुत ध्यान दे रही है और बहुत सारे स्कीम भी लती रहते है। जैसे जैसे सरकार कोई भी स्कीम लाएगी हम आपको इस साइट पे ओ सारे अपडेट देते रहेंगे।

अब जब आपलोग सोलर एनर्जी के बारे समझ चुके है, तो ए समझना बहुत जरूरी है की ए कितने प्रकार का होता हैं। और इसे लगाने में कौन कौन से उपकरण लगते हैं। और उनका क्या काम है।

रूफ टॉप सोलर दो प्रकार के होते हैं। (Two types of Roof Top solar)

  1. सोलर पैनल (Solar Panel) बैटरी के साथ, ऑफ ग्रिड (Off Grid)
  2. सोलर पैनल (Solar Panel) बिना बैटरी के साथ। ऑन ग्रिड (On Grid)

रूफ टॉप सोलर में उपयोग होने वाले  उपकरण (Components used in Roof Top system)

वैसे तो रूफ टॉप सोलर (Roof top solar) में बहुत सारे उपकरनो की जरूरत होती है या प्रयोग में आते है, पर जो सबसे जयादा जरूरी है और जिसके बिना हम रूफ टॉप सोलर (Roof top solar) लगा हीं नहीं सकते, उसके बारे में हम बात करेंगे।

सोलर मॉडुल  (Solar Module)

रूफ टॉप सोलर
रूफ टॉप सोलर

सोलर मॉडुल, रूफ टॉप सोलर का सबसे अहम् हिस्सा है। इसी के द्वारा सूरज के किरणों से बिजली उत्पन होती है। चुकी एक मॉडुल केवल 245 वाट हीं बिजली उत्पन्न कर सकती है। वैसे मार्किट में अलग अलग रेटिंग का मॉडुल मिलता है, पर अभी तक 545 वाट तक का हीं मार्किट में उपलब्ध है। इसलिए हमे बहुत सारे मॉडुल को जोड़ना होगा ताकि हम अपने जरूरत के अनुसार बिजली प्राप्त कर सके। इसके लिए हमे सारे मॉडुल को सीरीज में जोड़ना होगा जिसे ऐरे (Array) या स्ट्रिंग (String) कहते हैं।

सोलर इन्वर्टर (Solar Inverter)

चुकी सोलर मॉडुल से जो बिजली उत्पन्न होती है ओ DC (Direct Current) होता है पर हमारे घर में जो बिजली आती है ओ AC (Alternate Current) होता है। अतः हमें एक दूसरे उपकरण की जरूरत होती है जो डायरेक्ट करंट को अलटरनेट करंट में बदलता है, उसे इन्वर्टर कहते हैं। बाद में हम उस बिजली का उपयोग अपने घर के लिए करते हैं और अगर हमारा सोलर सिस्टम ग्रिड कनेक्टेड है तो जो भी बची हुई बिजली है ग्रिड में चली जाती है जिसका हमें सरकार के तरफ से सब्सिडी (subsidy) भी मिलता है।

Battery for Roof top solar

अगर हमारा रूफ टॉप सोलर (Roof top solar) ग्रिड कनेक्टेड है, तो हमें बैटरी की कोई जरूरत नहीं होती है, पर अगर ग्रिड कनेक्टेड नहीं है तो जो भी बिजली हमारे उपयोग के बाद बचेगा उससे हम बैटरी को चार्ज करते हैं, जिसका हम रात में उपयोग कर सकते है,  इसिलए हमें बैटरी की जरूरत होती है।

मॉडुल मॉउंटिंग स्ट्रक्चर (Module Mounting Structure for roof top solar)

रूफ टॉप सोलर
रूफ टॉप सोलर

मॉडुल मॉउंटिंग स्ट्रक्चर भी रूफ टॉप सोलर में बहुत अहम् भूमिका अदा करता है। ए हमारे मॉडुल को सपोर्ट प्रदान करता है और साथ हीं यह मॉडुल को छत पे लगाने में मदद भी प्रदान करता है, जिसके कारन आंधी, तुप्फान या बंदरो से हमारे मॉडुल को कोई नुकसान नहीं पहुँचता है। इसके साथ साथ यह हमारे मॉडुल को एक सिमित एंगल में लगाने के लिए भी मदद करता है ताकि सूरज की किरण जयादा से जयादा समय तक मॉडुल पे पड़े।

AC डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स (AC Distribution box or ACDB)

सेफ्टी को धयान में रखते हुए AC डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स की बहुत अहम् भूमिका अदा करता है। इन्वर्टर से आने वाली AC करंट पहले इसी बॉक्स में आता है ताकि मरम्मत करते समय हम यहाँ से स्विच को बंद कर सके और मरम्मत करते समय कोई दुर्घटना ना हो। ACDB में सार्ज प्रोटेक्शन डिवाइस (surge protection device) भी लगा होता है जो हाई वोल्टेज से इन्वर्टर को बचता है

लाइटिंग अरेस्टर (Lighting Arrester)

जैसा की हम सब ने तड़का के बारे में सुना है और ऐ जानते भी है की अगर कहीं यह गिरता है तो काफी नुकसान पहुँचता है। इसी कारण जब हम रूफ टॉप सोलर (Roof top solar) अपने छत पर लगते हैं तो लाइटिंग अरेस्टर भी लगवाना भी बहुत  जरूरी होता है इससे हमारा घर भी सुरक्षित हो जाता है और सारे उपकरण भी सुरक्षित रहते है।

केबल (Cable)

सारे उपकरण को एक दूसरे से जोड़ने के लिए केबल की जरूरत पड़ती है। ये बात धयान देने वाली है की यहाँ हमें AC और DC दोनों केबल की जरूरत पड़ेगी। DC केबल का प्रयोग मॉडुल से इन्वर्टर को जोड़ने में प्रयोग किया जाता है। और इन्वर्टर के बाद AC  केबल को बाकि के उपकरण को जोड़ने के लिए किया जाता है।

रूफ टॉप सोलर कैसे लगवाए ? (How to install Roof top solar)

सोलर सिस्टम लगवाने के लिए सबसे पहले आपको ए सुनिश्चित करना होगा की आपके छत पे प्रयाप्त जगह होना चाहिए। आज बहुत सारी कंपनी हैं जो की रूफ टॉप सोलर लगाती है, आपको बस उनसे संपर्क करना है। ओ खुद हीं आपके घर पे आ जायेंगे और जो भी मटेरियल के बारे में मैंने आपको बताया है उन सब के कॉस्ट (price) के बारे में आपको बता देंगे।

अगर आपको कंपनी का डिटेल पता करना है तो हमें कमेंट कर के बताये। हम आपको उस कंपनी का डिटेल भेज देंगे। उसके बाद सरकार के तरफ से जो भी स्कीम होगी, उसके तहत आपको सब्सिडी भी मिल जाएगी।

रूफ टॉप सोलर लगाने के क्या फायदे है (Advantage of roof top solar)

छत पे सोलर पैनल लगाने के बहुत सारे फायदे है, उनमे से हम 10 सबसे बड़े फायदा निचे बताय गए हैं।

  1. अगर जो बिजली हमने उपयोग में नहीं ली गई है, ओ बची हुई बिजली ग्रिड में चली जाएगी जिससे हमें बिजली बिल में छूट मिलती है।
  2. इसको लगाने से पोलुशन नहीं होता है।
  3. इसको लगाने के बाद इसमें कोई मरम्मत करने की जरूरत नहीं होती है।
  4. बिजली बिल काफी काम आता है।
  5. सरकार के तरफ से इसको लगाने के लिए सब्सिडी भी मिलती है, इसलिए इसे लगाने में जयादा खर्च भी नहीं लगता।
  6. बैटरी लगा होने से हम रात में भी इसका प्रयोग कर सकते है।
  7. इससे हम पानी भी गरम कर सकते है, और इलेक्ट्रिक कार को भी चार्ज कर सकते हैं।
  8. घर की सुंदरता बढ़ जाती है।
  9. बिजली बिल काम आने से कुछ हीं सालो में हमारा सारा पैसा वसूल हो जाता।
  10. इसका रख रखाओ भी आसान है।

इम्पोर्टेन्ट लिंक (Important Link)

डोपिंग (Doping) क्या है और सोलर सेल बनाने में यह कैसे काम करता है ?

वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड

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